Sunday, 4 October 2020

बौराया हुआ आम का पेड़



 सुनो यार, 

प्रेम की पगडंडियों पर तुम्हारे संग बेखौफ चलने वाला मैं, आज कल डर जाता हूँ जमाने की बनाई इन रीति- रिवाज की सड़को से। तुम्हारी चुनरी को थाम ,जुनरी के खेत की मेड़ों से होते हुए।जब हम तालाब के किनारे आम के पेड़ पर पहुँचते थे तो ऐसा लगता था जैसे कि अपनी एक अलग दुनियाँ में आ गए हों। आम के पेड़ से एक चीज जरूर सीखा था। कि प्रेम आम के फल की तरह होता है। अपरिपक्व हो तो कड़वा लगता है,अर्धपरिपक्व हो तो उसमें कड़वाहट और मिठास दोनो  महसूस होता है और जब पूर्ण परिपक्व हो जाता है तो सिर्फ मिठास देता है और अपनी खुशबू से अपने आस पास के लोगो को आनंदित करता है। हम एक दूसरे प्रेम में तो उस समय आम के पेड़ की तरह बौराये(आम के फल के बीज का आना) हुए थे। 

... #जलज कुमार


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