वो कहती थी,
यार तुम जैसे हो वैसे ही रहो। मैं बात तो करती हूँ न तुमसे और मैं उससे अक्सर कहता था कि "यार बेनाम रिश्ते अक्सर बदनाम होते हैं।प्रेम सिर्फ कृष्ण और राधा का पवित्र माना जाता है वरना इनके सिवा हर प्रेम परीक्षाओं से गुजरा है। ये वही समाज है जिसने पवित्रता के लिए माँ सीता की अग्नि परीक्षा लीं है।"शायद हमारी ये बातें हमारे रिश्ते को बदल चुकी थी। हम कोशों दूर निकल आये थे। उन कस्मों और वादों से जिनमें एक दूजे का साथ जरूरी होता है।हमारे प्रेम से पहले हमारे लिए हमारा परिवार और उनकी खुशीयां थी। हम सम्भालते थे एक दूसरे को, नाराज होते थे एक दूसरे से, मैं अक्सर उससे पूछ बैठता था " कि क्या हम फिर कब और कहां साथ होंगे", वो बोलती थी "शायद आसमां में तारा बनकर"
... #जलज कुमार

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