बहिन लाडो,
मैं ना ही तुम्हारा नाम जानता हूँ, न ही तुम्हारी जाति या धर्म। तुमसे मेरा वैसा कोई रिश्ता भी नहीं है कि मैं तुमसे कभी मिला होऊँ। लेकिन कुछ सवाल मन मैं आज भी हलचल करते है कि किसी के साथ हुए अन्याय के लिए लड़ने पर उससे किसी रिश्ता का होना जरूरी है क्या? मुझे पता है कि कुछ दिन या महिनो तक सड़को पर तुम्हारी तस्वीर के सामने मोमबत्तियाँ पिघलेंगी, हो सकता है कुछ लोगो को राजनीतिक फ़ायदा भी हो जाए लेकिन क्या इन सबके बाद मेरी बहन या इस देश की कोई भी बेटी खुद को सुरक्षित महसूस करेगी। मैं तुमसे ये नही कहूंगा कि ये दुनियाँ तुम्हारे रहने लायक नही रही बल्कि ये कहूंगा कि हमारे जैसे लडको के अंदर छिपे बहसी दरिंदो ने इसको तुम्हारे रहने लायक रहने नही दिया। आज हमारे जैसे वो हजारों लड़के तुम्हारे लिए इंसाफ मांगेंगे जो किसी लड़की को देख सबसे पहले उसकी शारीरिक अंगो के आधार पर उसकी सुंदरता को तय करते हैं।हो सकता है मेरे अंदर भी छिपा हो कोई एक दरिंदा पर से शायद मेरी बहिन और बेटी की तस्वीर उसको इंसान बनाये रखे होगी या हो सकता है,शायद मेरे संस्कार। बहिन लाडो, मैं आज प्रतिज्ञा करता हूँ कि भले ही मै तुम्हारा लिए मोमबत्ती ना जला सकूँ पर हाँ आज से अधिक कोशिश जरूर करूँगा कि प्रत्येक स्त्री को दुगने सम्मान से देखूं। तुम जब दोबारा जन्म लेना तो बनना मेरी बहिन या बेटी और मै कोशिश करूँगा तुम्हारे लिए बेहतर समाज बनाने की।तुम्हारा अजनबी भाई
...जलज कुमार
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