Sunday, 27 September 2020

गुणनफल ....

 सुनो कॉमरेड, 

कुछ बातें जो सदैव दो लोगो के बीच होती हैं। कुछ बातें जिनमें दो लोगो की भावनाओं और यादों का गुणनफल विद्यमान होता है। कुछ ऐसी ही बातें तो थी हमारे बीच, स्कूल के नीम के पेड़ के नीचे वाले चबूतरे पर यूँ तुम्हारा मेरा हाथ थामना। मुझे सातवें आसमान की सैर करवाता था। मैं तुम्हें कितने ही नामों से पुकारता था। नाम जो मैंने प्रेम में तुम्हें दिये थे।

मुझे नही पता कि जीवन में मुझे तुम्हारा साथ क्यूँ नही मिला। अगर हाँ मिलता तो मैं हर वो जगह तुम्हारे संग देखने जाता जो हमारी इतिहास की किताब के सबसे आखिरी पन्ने पर विद्यमान थे।कभी कभी हमारे ख्वाब ही कम्बख्त इतिहास बन जाते हैं। वैसे इतिहास अच्छा हो या बुरा सीख जरूर देता है। तुम और तुमसे जुडी यादें मुझे हर वक़्त सिखाती हैं कि प्रेम हर किसी से करो पर मोह किसी से ना रखो। मेरे जीवन के कुछ हसीं हिस्सों की हिस्सेदार बनने के लिए तुम्हारा शुक्रिया कॉमरेड. .. 

.... तुम्हारा दोस्त

. ..जलज कुमार

इम्यूनिटी 🤣

 सुनो कॉमरेड,

मैं जो तुम्हारे संग पूरे शहर को घूमता था।अब कुछ दूर चलने पर थक जाता हूँ।पता नहीं क्यूं ये थकान मुझे थका देती है।कभी कभी हमारे जीवन में कोई ऐसा शक्स आ जाता है। जो हमारी इम्युनिटी बन हमारी हर तकलीफ से लड़ता है। जिसके साथ ना होने पर हमें हर कोई चारों खाने चित्त कर देता है। जिसे साथ होने पर ये दुनियाँ फूलों सी खुशनुमा और ना होने पर काँटों सा काटती हुई नजर आती है। 

वैसे जीवन के हर पड़ाव पर तुम या तुम्हारी यादों ने सदैव मेरा साथ दिया।वैसे साथ सिर्फ साथ होकर नहीं दिया जाता। कभी कभी साथ एहसास कराकर भी दिया जाता है।जब तुम छत पर आसमां में तारे देखते हुए, मुझसे कहती थी कि " हम सदैव साथ रहेंगे" तो मैं तुम्हारा हाथ थाम लेता था और तुम मेरी साँसे........ 

.... #जलज कुमार

पडोसी

 जकड़े

ख्वाहिश तुमसे 😊

 थम जाएं गर मेरी साँसे तो गम मत करना, 

मुझसे अपनी मोहब्बत कम मत करना

एक रोज हसीन ख्वाब बनकर, 

आऊंगा तुम्हारी आँखों में, 

यार बस तुम ख्वाब देखना बंद मत करना। 

... #जलज कुमार

आसमां और तुम...

 सुनो कॉमरेड, 

कहीं दूर जहाँ आसमां जमीं का होता है। जहाँ लहरें किनारों का सहारा पाती हैं। जहाँ पानी बर्फ का हो जाता है। जहाँ छाँव धूप को सुकूँ देती है। मैं तुम्हारे साथ जाना चाहता हूँ। मुझे नहीं पता उस जगह भी तुम मेरी होओगी या नहीं पर मैं इन ख्वाहिशो को पूरा करना चाहता हूँ।क्युकी ख्वाहिशे व्यक्ति को जीवित रखती हैं। बिना ख्वाहिशों के व्यक्ति मौत और मोक्ष के समीप होता है।

.... #जलज कुमार

मेला और तुम....

 सुनो कॉमरेड, 

मुझे नही पता कि दर्द में काँधे का मिलना कितना सुकूँ देता है। मुझे नही पता कि कैसे एक सोलह साल के लड़की शादी के बाद एक औरत बन जाती है। मुझे नही पता कि प्रेम में पड़ा हर आशिक क्यूँ कविताओं को लिखता है। मगर जहाँ तक समझ पाता हूँ तो पता चलता है कि हर परिवर्तन की एक वजह होती है।तुम्हारे बदलने की भी कोई वजह रही होगी जो शायद मेरे लिए बेवजह रही होगी।मुझे आज भी याद है वो दिन जब तुम मेले में आसमानी झूले पर मेरे साथ बैठी थी। आँखे बंद कर जो विश्वास तुम मुझ पर जताती थी। वो शायद किसी ने आँखों के खुले होने पर भी नहीं जताया होगा। उस आसमानी झूले में बैठ मैं अपने जीवन के दो सबसे अजीज हिस्सों को देख खुश होता था। एक तुम और एक ये मेरा शहर।वैसे वो शहर जहाँ हम अपना बचपन बिताते हैं। कभी हमसे भुलाया नही जाता वैसे ही बचपन के प्यार को भी हम नही भुला पाते।बस यही कारण है कि तुम मेरी यादों से बिसर(भूलकर) कर नहीं जाती कहीं.... 

. .......#जलज कुमार

ख़त तुम तक...1

 सुनो यार कॉमरेड , 

आज बेटी दिवस है। मुझे पता है कि एक बेटी होना और बेटी बनना दोनो में जमीं आसमां का अंतर है।तुम्हारे साथ जो वक़्त गुजरा उस वक़्त में मैंने सीखा कि एक बेटी बनना कितना मुश्किल और संघर्ष पूर्ण होता है। सिर्फ अपने पिता और परिवार की ख्वाहिशों के लिए खुद के सपनो की जीवन रूपी यज्ञ में आहुति देना आसान नहीं होता है। तुम जो मेरे बिन एक पल भी नहीं रह पाती थी। मेरे बिना जीवन बिताना सीख गयी हो। तुम अक्सर पूछती थी "अगर हमारी शादी हुई तो हमें बेटा होगा या बेटी" और मैं शर्मा जाता था। प्रेम में हम कुछ सपने बुनते, दो सिराहियों की तरह। बिल्कुल हम भी तो वैसे ही बुनते थे सपने। कुछ सपने पूरे हो ये भी जरूरी नहीं। मुझे आज भी याद है मुझे तुमसे वो आखिरी मुलाकात जब तुमने मुझसे कहा था " यार सपनो की कीमत अपना से ज्यादा नहीं होती। " उस दिन तुम सच में एक बेटी थी । वो बेटी जिस पर हर बाप को गर्व होता है। मैं तुम्हें बेबफा कहकर भी खुद को दिलासा दे सकता था। मगर तुमसे प्रेम ही इतना था कि तुम्हारी खुशियों में खुश रहना सीख लिए थे। यार कॉमरेड उस दिन सोच लिए थे कि अपनी बेटी को तुम्हारा नाम भले ही ना दे पाऊँ पर उस तुम जैसा ही बनाऊँगां और कोशिश भी करूँगा कि उसके सपनो का भी ख्याल रखूँ ।

.... #जलज कुमार

"क्लीनिक प्लस वाली"

 प्रस्तावना: ये कहानी छोटे से कस्बे में रहने वाले दो 16 साल के बच्चों की है। प्रेम की अलग अलग परिभाषाओं की सहायता से समाज के बनाए रास्तों पर...