सुनो यार,
आसमां में जब भी देखता हूं तो टिमटिमाते हुए तारों में तुम्हारा अश्क दिखाई देता है। वो छत की मुंडेर पर मेरे साथ रात में बैठकर तुम ही तो कहती थी कि "मेरे इस दुनियाँ में ना होंने पर तुम आसमां में मुझे ढुंढ़ना और जब भी कोई तारा टिमटिमाए तो समझ जाना मैं तुम्हें देख पलको को झपका रही हूँ" और मैं तुम्हारे कंधे पर सिर रख उदास हो जाता था। यार कभी कभी लगता है कि यह अच्छा ही है कि हमें हमारी मौत का पता, पता नहीं होता है। वरना हम में से ना जाने कितनो ने रास्तों पर चलने का हौंसला ही न किया होता। लेकिन मेरे संग चलने का तुम्हारा ये हौंसला कैंसर जैसी बीमारी के भी हौंसले पस्त कर देता था। तुम्हारी जुल्फों में उंगली फंसा अपनी उलझने दूर करने वाला मैं तुम्हें बिन बालों के देख अंदर ही अंदर घुटन महसूस करता था।जिस दिन तुम मुझे छोड़ कर गयीं थी उसी दिन से मैंने आसमां में टिमटिमाते तारों से दोस्ती कर ली थी।इस उम्मीद में कि तुम अपना ये वादा तो पूरा करोगी।
... #जलज

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