सुनो यार,
किताबों के पन्नो को पलटते हुए आज तुम्हारे साथ खिचवाई पुरानी तस्वीर मिली। उस देख एक बात समझ आ गई कि ये जरूरी नही जो हमारे साथ तस्वीर में होते हैं। वो ताउम्र हमारी तकदीर में भी हों। वैसे बहुत अरसा बीत गया है तुम्हें जी भर निहारे हुए। मुझे नही पता था तलाक एक हँसते खेलते रिश्ते को राख बना खाक कर देता है। सच बताऊँ यार अब थक गया हूँ,जीवन की इस भाग दौड़ से।अब लगता हैं कि रख दूँ तुम्हारे आँचल में अपना सिर और तुम अपनी उंगलियों की पोरों को मेरे बालों के बीच बने रास्ते में भटकाओ। अब तो कोई उम्मीद भी नही है।हमारे साथ आने की पर ना जाने क्यूँ मन करता है। कि हम फिर मिलें,अंजान बनकर जैसे हम मिले थे कॉलेज के ग्राउंड में।हमने प्रेम करते वक्त और शादी करते वक्त कभी सोचा ही कहाँ था अपने अलग होने विषय में। काश उस रोज तुम्हें रोक लेता मैं अपने जीवन से दूर जाने से। जिन चंद पन्नो में प्रेम पत्रों का रूप बनकर हमने मिलाया था। आज वही चंद पन्ने तलाक के कागज बन हमें अलग कर रहें हैं। सुनो फिर मिलते हैं ना। पूर्व पति पत्नी नही बल्कि वो ही 10 साल पुराने वाले दोस्त बनकर.....
..तुम्हारा तलाकशुदा पति.....
... #©जलज कुमार

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