प्रिय कॉमरेड,
सुनो यार,
जीवन के इस पड़ाव पर आज तुम्हारी कमी खल रही है। मुझे नही पता हर रोज क्यूँ तुम्हारा ख्याल अक्सर मेरे ख्याल में आ जाता है। लेकिन आज तुम्हारी याद आने की मेरे पास एक वाजिब वजह है। तुम जो मेरी हर खुशी का ख्याल रखती थीं। न जाने क्यूँ अब जानबूझ कर मुझसे नाराज हो। सच मैं नहीं बर्दाश्त होती एक छोटी से भूल की इतनी बडी सजा। शरीर से आत्मा को छीन उससे आत्मीयता दिखाने का कोई महत्व नही रहता। व्यक्ति खुद को तो कुछ समय बाद बदल लेता है। लेकिन मुझमें तो तुम आज भी विद्यमान हो जैसे दोपहर में चाँद,जन्म और मरण के इस भँवर में फंसे मानव को एक प्रेम ही तो आनंदित करता है। बढती उम्र के इस पड़ाव के साथ मैं हर एक क्षण तुमसे कोसों दूर जाता हूँ। मुझे नही पता हम किस चौक या चौराहे पर वापस मिलेंगे।क्युकी मैने मंजिलों से उम्मीदों को रखना छोड़ दिया है। हाँ रास्तों पर थोड़ा भरोसा आज भी है।मुझे नही पता तुम दिन भर में कितनी हिचकियाँ लेती हो पर ये जरूर है कि मेरी कई रातें जरूर तुम्हारा स्मरण कर सिसकियों में बीतीं हैं। पता नही तुम्हें उस वजह की वजह पता है कि नही जिस वजह से आज मुझे तुम्हारी कमी खल रही है।खैर छोड़ो.....
सिर्फ तुम्हारा,
... #जलज राठौर

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