Sunday, 28 July 2019

आज फिर वो पगली गुलाबी रंग से नहायी होंगी,

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. आज फिर वो पगली ,गुलाबी रंग से नहायी होगी, 
आज उसे जरूर मेरी याद आयी होगी, 
खूब रोके होंगे उस पगली ने अपने आँसू, 
जब किसी ने उस पर रंगभरी पिचकारी चलायी होगी, 
आज फ़िर ,उसकी जुल्फे लहरायी होंगी,
 जब आँखो में अपनी उसने ,हमारी स्कूल की होली वाली यादे पायी होंगी, 
आज फिर ,उनकी सागर जैसी आँखों में बाढ़ आयी होगी, 
उन्हें मेरी शरारते जरूर याद आयी होंगी, 
जब किसी ने उनके बालो के बीच रग भरी डिबिया गिरायी होगी, 
आज फिर वो पगली गुलाबी रंग से नहायी होंगी, 
आज फिर उसने दर्द से  भरी होंगी आहें , जब किसी गैर ने उनकी थामी होंगी बाहें, 
सूखे शिथिल पड़ गए होंगे उसके गाल, 
जब काफ़िर ने उन पर लगाया होगा गुलाल, 
फिर उसकी आँखे अश्को से भर आयी होंगी,
 जब उसे मेरे स्पर्श के एहसास की याद आयी होगी, 
आज फिर वो पगली गुलाबी रंग से नहायी होंगी, 
आज उसे जरूर मेरे गुजियों वाले टिफिन की याद आयी होगी,
 जब खुद उसने अपने हाथो से गुजिया बनायी होंगी, 
अब हमारा मिलना किस्मत में नहीं, यही बात उसने दिल को समझायी होंगी, 
नाम बदल हमारी कहानी ,अपने बच्चों को सुनायी होंगी, 
आज फिर वो पगली गुलाबी रंग से नहायी होंगी, 
फिर दूर उससे मेरी परछायी होगी, 
दिल में उसके, खातिर मेरी रुसवाई होगी, साथ उसके सब होकर भी, सिर्फ तन्हाई होगी, 
आज फिर उनकी आँखे अश्को से भर आयी होंगी, 
ए जलज तेरे साथ बीती स्कूल की होली वाली यादें, 
जब याद उन्हे  आयी होंगी, आज फिर वो पगली गुलाबी रंग से नहायी होंगी
......... #जलज कुमार राठौर
#बेदर्द_स्याही

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