Saturday, 22 December 2018

सावँली_सी_वो_लडकी


सावँली_सी_वो_लडकी

लवो की खामोशी उनकी कुछ बयाँ कर रही थी
जुल्फे काली ,कानो की बाली और होठो की लाली
हमे घायल कर रही थी
पर चेहरे पर एक मुस्कान थी
चन्द पल के लिये ही सही वो हमारी जान थी
मैं नही कहता वो कोई अप्सरा या परी थी
मगर चन्द पल के लिये ही सही वो मेरी जिन्दगी थी
नीली #चुनरी उसकी उडती जा रही थी
नजरे मेरी उनके ख्वावो में डूबी जा रही थी
मैने सब कुछ चन्द पलो को भुलाया था
उनकी हाथो की #घडी ने मुझे अपने वक्त में फसाया था
वो बार-बार अपनी जुल्फो को कानो का रास्ता मुक्ममल करा रही थी
उनकी ये अदा इस दिल मे अपना जहाँ बसाये जा रही थी
ए-#जलज ना जाने क्यू वो मुस्कराये जा रही थी
दर्द अपना सबसे छिपाये जा रही थी
जिन्दगी से कुछ परेशान और कुछ थकी सी थी
यारो वो फिर भी उन पलो में मेरी जिन्दगी थी........
......#जलज_राठौर
#सावँली_सी_वो_लडकी

"क्लीनिक प्लस वाली"

 प्रस्तावना: ये कहानी छोटे से कस्बे में रहने वाले दो 16 साल के बच्चों की है। प्रेम की अलग अलग परिभाषाओं की सहायता से समाज के बनाए रास्तों पर...